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पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध- Effect of environmental pollution in hindi

पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध-Effects of enviromental pollution in hindi:- 

हेलो दोस्तों पिछले आर्टिकल में हमने प्रदूषण की समस्या पर निबंध पढ़ा और जाना प्रदूषण किस तरह हमारे प्रकृति के अमूल्य तत्वों को लगातार नष्ट कर रहा है।

हमारे पर्यावरण पर लगातार इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है। पर्यावरण की संपदा एवं सुंदरता भीड़ होती जा रही है प्रदूषण का प्रसार हमारे प्रकृति पर आक्रामक रूप से हावी होता जा रहा है।

तो दोस्तों आज हम पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध पढ़ेंगे जिसमें हमें पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान पर पूरी जानकारी प्राप्त होगी। तो इस लेेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध (Effects of environmental pollution in hindi) में विभिन्न निबंध प्रतियोगिता में सहायता करेंगे एवं विभिन्न कंप्लीट एग्जामिनेशन जैसे कि SSC,UPSC,UPSSSC के लिए भी लाभदायक सिद्ध होंगे।

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और इसके प्रभाव पर निबंध
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और इसके प्रभाव पर निबंध

Content (रूपरेखा):-

1) Paryavaran pradushan par nibandh 10 line
2) पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध। (100-200 शब्दों में)
3) पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध। (200-250 शब्दों में)
4) पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध। (300-500 शब्दों में)
5) पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान पर निबंध। (500-1000+शब्दों में)
(i)प्रस्तावना
(ii) पर्यावरण प्रदूषण के पीछे मुख्य कारण/Main reasons behind environmental pollution
(iii) प्रदूषण में इतिहास का योगदान
(iv)पर्यावरण प्रदूषण के पर्यावरण पर प्रभाव
(v) पर्यावरण प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव।
(vi) पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का समाधान
(vii) उपसंहार।

Paryavaran pradushan par nibandh 10 line:-

1-मानव के स्वार्थ के कारण पर्यावरण निरंतर ही अपनी महत्वता खो रहा है।

2-वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, शोर प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, रेडियोएक्टिव प्रदूषण पर्यावरण प्रदूषण में मुख्य है।

3-बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के कारण मनुष्य का जीवन पतन की ओर बढ़ रहा है।

4- पर्यावरण प्रदूषण की वजह से अनेक बीमारियां पैर पसार रही है।

5-डायबिटीज, नेत्र रोग, चर्म रोग, कैंसर, सांस की बीमारियां पर्यावरण प्रदूषण का निष्कर्ष है।

6-पर्यावरण में प्रदूषण का मुख्य कारण मनुष्य के दुष्कर्म ही है।

7-बढ़ते औद्योगीकरण के कारण प्रदूषण का प्रसार बढ़ रहा है।

8-उद्योगों के कचरे नदियों में निष्कासित करने पर जल प्रदूषण उत्पन्न होता है।

9- बढ़ते वाहनों के प्रयोग से शोर व वायु प्रदूषण उत्पन्न होता है।

10- पेड़ लगाना व नियमों का पालन करना प्रदूषण को रोकने में समर्थ हैं।

Paryavaran Pradushan par nibandh 10 line
Paryavaran Pradushan par nibandh 10 line

पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध- Effects of environmental pollution in hindi (100-200 शब्दों में)

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ/परिभाषा:- 

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ जानने से पहले हमे प्रदूषण का अर्थ पता होना चाहिए।
 
प्रदूषण का अर्थ हैं 'बर्बादी' और 'महत्वहीनता'। प्रदूषण अपने आप में एक नकारात्मक शब्द है जोकि किसी पदार्थ के नष्ट एवं खराब होने को दर्शाता है।

प्रदूषण शब्द अपने आप में खराबी को दर्शाता है। खराबी किसी भी चीज की अच्छी नहीं होती फिर चाहे वह पर्यावरण के तत्व हो या हमारा अमूल्य समय।

क्या अपने इसे पढ़ा:- 

अमूल्य समय को नष्ट ना करे।

मुख्यतः पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ होता है पर्यावरण के बहुमूल्य व संपदा का हनन होना।

पर्यावरण के तत्वों का नष्ट व अर्थहीन होना पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है। आज के समय में पर्यावरण प्रदूषण एक भयावह बीमारी के रूप में उभरा है।

प्रदूषण कैसे होता है?

जब हम अपने प्रकृति के अमूल्य तत्वों का दुरुपयोग करते हैं तब प्रदूषण उत्पन्न होता है। प्रदूषण कई रूपों में विद्यमान है जैसे कि जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण,भूमि प्रदूषण,औद्योगिक प्रदूषण,शोर प्रदूषण इत्यादि।

जल प्रदूषण का मुख्यता जल का दुरुपयोग, वायु प्रदूषण में वायु का प्रदूषित होना, भूमि प्रदूषण में भूमि के उपजाऊपन का नष्ट होना, औद्योगिक प्रदूषण में उद्योगों से संचालित प्रदूषण एवं शोर प्रदूषण में विभिन्न प्रकार के शोर का उत्पन्न होना सम्मिलित है।

पर्यावरण प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है?

पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हमें पर्यावरण के प्रति तत्वों को संरक्षित करना पड़ेगा तभी पर्यावरण प्रदूषण का रोकथाम संभव है हमें पेड़ों के अस्तित्व को बचाना होगा उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग पर रोक लगानी होगी भारत सरकार द्वारा बनाए गए प्रदूषण के खिलाफ सख्त नियमों का सख्ती से पालन करना होगा गंदगी फैलाने की आदत को रोकने होगी।

उपसंहार:- 

ये प्रकृति हमारी हैं। इसकी देखभाल करना हमारा परम कर्तव्य है। यदि हम आज नहीं चेते तो कभी भी अपने जीवन को सुरक्षित नहीं रख सकते। हमारी प्रकृति रूपी संपदा को बचाना हमारी जिम्मेदारी है।

पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध- Effects of environmental pollution in hindi (200-250 शब्दों में):-

भूमिका:-

हमारे लिए सबसे ज्यादा यह जानना जरूरी है कि हमारी किन गतिविधियों के कारण आज हमें हमारे पर्यावरण को विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

हमने अत्याधिक पेड़ों की कटाई, लगातार उद्योगों का शुरू करना, अपने स्वयं के स्वार्थ के लिए मृदा में अलग-अलग प्रकार के उर्वरक का इस्तेमाल करना, कूड़े कचरे व गंदगी को नदियों में बहाकर, अपने जानवरों को नदियों व तालाबों में नहला कर, वाहनों का धुआंधार प्रयोग करके अपने प्रकृति की दुर्दशा कर दी है।

इन कारणों के कारण आज हमारा वातावरण इतना प्रदूषित हो गया है कि हमारे लिए खुली हवा को प्राप्त करना एक सपने के समान हो गया है जो कि नामुमकिन सा लगता है। हमारे घर के बाहर निकलते ही धूल मिट्टी गंदगी का विस्तार होता दिखाई देता है।

पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है-

प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नलिखित है-

1) अंधाधु वनों की कटाई:- 

आज से कुछ सालों पहले तक का नजारा यह था कि हमें जगह-जगह पेड़ पौधे व हरियाली दिखाई पड़ती थी। गांवों में तो हर तरफ हरियाली का नजारा ही हुआ करता था।

घरों की संख्या जरूरत से भी कम हुआ करती थी। आज के समय स्थिति बिल्कुल ही उलट है शहरों में जहां भी नजर जाए, सब जगह वनो को हटाकर घर ,उद्योग आदि का निर्माण हो चुका है

वनों की जगह अब सीधे-सीधे इमारतों ने ले ली है।

2) बढ़ती जनसंख्या:-

पर्यावरण प्रदूषण के पीछे बढ़ती जनसंख्या भी मुख्य कारणों में से एक है आज के समय में बढ़ती जनसंख्या प्रत्येक समस्याओं के पीछे का कारण है जिस जिस तरह जनसंख्या बढ़ रही है उसकी जरूरत के अनुसार उन्हें भुवन, खाना बा अन्य सुविधा मुहैया कराना चुनौतीपूर्ण है।

3) उद्योगों का विस्तार:-

जिस प्रकार हमारा देश औद्योगिकरण की ओर बढ़ रहा है वैसे-वैसे यह प्रदूषण की चपेट में आ रहा है।
बढ़ते औद्योगीकरण प्रदूषण के पीछे का सर्वप्रमुख कारण है। 

उद्योगोंसे निकलने वाले कचरे,अपशिष्ट कूड़ा व गंदगी का सही निस्तारण नहीं हो पाता है, जिसके चलते उन्हें गैर कानूनी तरीके से नदियों में निष्कासित कर दिया जाता है और यही कचरा हमारी प्रकृति की दुर्दशा करने में महत्वपूर्ण योगदान निभाता है।

4) उपसंहार:- 

हम मानव प्रकृति से जुड़े हैं यदि प्रकृति का नाश होगा तो हमारा नाश भी निश्चित है। यदि हम प्रकृति का अनहित करेंगे तो उसे हमारा अतीत करना बहुत बेहतर तरीके से आता है।

इसलिए हमारे लिए अच्छा होगा कि हम प्रकृति के साथ अपने दैनिक जीवन का संतुलन बनाए रखें इसी में हम सब की भलाई है।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध- Essay on environmental pollution in hindi (300-500 शब्दों में):-

प्रस्तावना:-

पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण के कारण वातावरण का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है जिसके कारण हमारे वातावरण की दुर्दशा होती जा रही है। प्रदूषण के कारण मौतों के आंकड़ों में भी वृद्धि आई है।

पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध
पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रभाव पर निबंध

मौसम के परिवर्तन चक्र पर भी बहुत बुरा प्रभाव देखने को मिला है आज का मौसम इस तरह बदलता है कि आप इस समय को देख कर बता ही नहीं सकते यह कौन सा मौसम है पल में ठंड पल में बारिश और पल में धूप।

मौसम के इस और संतुलन चक्र के कारण ढेरों बीमारियों का चारों ओर बसेरा हो हो चुका है।

पर्यावरण प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं:-

पर्यावरण के नष्ट होते तथा विभिन्न प्रकार के प्रदूषण को जन्म देता है जो कि निम्नलिखित है-

1- वायु प्रदूषण:- 

वातावरण में जहरीली गैसों के मिलाप से वायु प्रदूषण की उत्पत्ति होती है आज के समय में वायु प्रदूषण का प्रसार हद से ज्यादा हो चुका है आजकल खुली हवा सिर्फ एक ख्वाब के समान है खुली व ताजी हवा लेना नामुमकिन सा हो गया है।

वायु प्रदूषण पर निबंध 

2- जल प्रदूषण:- 

जैसा कि हम सब इस बात से अच्छे से वाकिफ है कि-जल ही जीवन है। जहां एक और जल के बिना एक पल भी जीना दूबर सा लगता है वहीं दूसरी ओर जिनके पास जल का संरक्षण है वह उसे बिंदास होकर बर्बाद करते हैं और यही बर्बादी जल प्रदूषण को जन्म देती है।

जल प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

3- मृदा प्रदूषण:-

जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारी मृदा हमारे लिए इतनी आवश्यक है। हम इसी मृदा पर पैदा होते हैं और इसी में विलीन हो जाते हैं। इसी से हमें फल ,सब्जी, गेहूं, अनाज सब मिलता है परंतु कुछ स्वार्थी व्यक्ति इसके अत्यधिक लाभ उठाने के लिए इसमें विभिन्न उर्वरकों को इस्तेमाल करते हैं जो कि मृदा प्रदूषण उत्पन्न करती है।

4- शोर प्रदूषण (ध्वनि प्रदूषण):-  

आज का समय टेक्नोलॉजी का समय है हम किसी ना किसी तरीके से टेक्नोलॉजी पर डिपेंड हो चुके हैं यदि हम से एक भी यंत्र छीन लिया जाए तो हमारे लिए जीवन यापन करना नर्क में जीवन यापन करने के समान हो जाता है।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी

इन्ही टेक्नोलॉजी की देन है हमारे आज के आधुनिक साधन जिसके निरंतर उपयोग से शोर प्रदूषण की उत्पत्ति होती है।

पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के उपाय:-

पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के उपाय हैं-
1) प्रतिदिन एक पेड़ लगाएं। प्रकृति रूपी संपदा का हनन होने से रोके।

2) किसी भी वस्तु को नष्ट होने पर फेकने के बजाय उसे फिर से इस्तेमाल करके दूसरी वस्तु बनाए।

3) वाहनों के अत्यधिक प्रयोग पर रोक लगाए। कम दूरी के लिए चलने को prefer करे।

4) Recycling को promote करे। अपनी thinking को डेवलप करे।

5) उद्योगों के कचरे के निस्तारण के लिए सही strategy अपनाए।

6) CNG के इस्तेमाल को बढ़ावा दें।

निष्कर्ष:- 

पर्यावरण प्रदूषण के कारण आज पर्यावरण की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है ।संपूर्ण विश्व इसके रोकथाम के लिए विभिन्न प्रकार की प्रणाली का उपयोग कर रही है। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए वक्त पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न दिवस  जैसे कि पर्यावरण दिवस, जल दिवस, ओजोन दिवस, पृथ्वी दिवस, जैव विविधता दिवस मनाए जाते हैं। 

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान पर निबंध- (500-1000+शब्दों में)

प्रस्तावना:- 

हमारा देश आज विभिन्न समस्याओं से घिरा है जैसे कि आतंकवाद, जनसंख्या वृद्धि, भ्रष्टाचार, प्रदूषण इत्यादि यह सभी समस्याएं मनुष्य से शुरू होकर मनुष्य को ही प्रभावित करती हैं परंतु इनमें से प्रदूषण की एक ऐसा विषय व समस्या है जिसे हम काफी हद तक रोकने में कामयाब हो सकते हैं। बस जरूरत है हमें सतर्कता जागरूकता व सही निर्देशों की।

पर्यावरण प्रदूषण के पीछे मुख्य कारण (Main reasons behind environmental pollution):-

पर्यावरण प्रदूषण के पीछे मुख्य कारण है-

अत्यधिक उर्वरकों का प्रयोग:-

जैसा किस बात से हम सब अच्छी तरह वाकिफ हैं कि हमारा भारत एक कृषि प्रधान देश है और हमारे यहां की एक बड़े हिस्से की जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।

जैसे की हम यह बात अच्छे से जानते हैं कि जिस क्षेत्र की अधिक मांग होती है वहां भ्रष्टाचार व गलत कार्य भी चरम पर होते हैं। ठीक इसी लाइन पर सही सिद्ध करते हुए कृषि को एकदम से बढ़ाने के लिए लोग विभिन्न ने कीटनाशक व उर्वरकों का धुआंधार प्रयोग करते हैं जो कि पर्यावरण को और संतुलित करने में परम पर है।

शहरीकरण का प्रसार:- 

जैसे-जैसे हमारा देश शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है वैसे-वैसे चीजों में बदलाव देखने को मिल रहा है इन बदलावों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव सम्मिलित है।

शहरीकरण की व्यापकता के कारण प्रदूषण का प्रभाव बढ़ता जा रहा है जोकि हमारे पेड़ पौधे वन संपदा मनुष्य जानवर सभी पीड़ित है। मनुष्य व पशुओं के जीवन अंत पर खड़े हैं।

वाहनों का प्रयोग:- 

आज का मनुष्य बहुत ही आलसी हो चुका है वह खुद से चलना ब खुद शिकार करना भूल ही चुका है हर कार्य के लिए वह टेक्नोलॉजी पर डिपेंड है फिर चाहे वह वाहन हो या आधुनिक उपकरण।

पेट्रोल और डीजल का अत्यधिक प्रयोग करने पर और वाहनों के इस्तेमाल के कारण विषैली गैसे प्रकृति की ताजा हवा में मिलकर उसे प्रदूषित करती है।

इन वाहनों का दुआ प्रकृति व मनुष्य के लिए बहुत हानिकारक होता है। यह अपने आप में किसी के संपूर्ण जीवन को खत्म कर देने की ताकत रखता है।

व्यक्ति की अविकसित मानसिकता:- 

व्यक्ति की गलत मानसिकता उसे गलत कर्म करने पर विवश कर देती है और उसके गलत कर्म सभी को हानि पहुंचाते हैं। व्यक्ति की विकसित मानसिकता उसके विवेक का हरण कर लेती है और इसी के चलते वह अपने जीवन और प्रकृति का नाश करने में लग जाता है।

प्रदूषण में इतिहास का योगदान:-

जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारे इतिहास में अगस्त महीने में 6 से 9 तारीख, 1945 के बीच में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में किए गए बम ब्लास्ट से पूरी दुनिया भली-भांति परिचित है। उस घटना के कारण फैले हुए वायु प्रदूषण से विकसित देश जापान आज तक उबर नहीं पाया है। उस भयानक बम ब्लास्ट के कारण विषैली गैसें पूरे वायुमंडल में फैल गई थी जिस का परिचय आज भी हमारी प्रकृति देती हैं।

यदि हम वैज्ञानिकों के आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो पिछले 100 सालों में 3600000 टन कार्बन डाइऑक्साइड हमारे वायुमंडल में छोड़ी गई है जिसकी वजह से हमारे पृथ्वी और वातावरण का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया है। बढ़ते मौसम की परिवर्तन इसी का कारण है।

पर्यावरण प्रदूषण के पर्यावरण पर प्रभाव:-

पर्यावरण प्रदूषण के पर्यावरण पर प्रभाव बहुत ही खतरनाक व दुख प्रदान करने वाले हैं। प्रकृति के के प्रत्येक तत्व आज प्रदूषित हो चुके हैं। मनुष्य ताजी खुली हवा में सांस लेने का सपना ही देख रहा है। जिधर देखो सिर्फ अशुद्ध हवा अपना डेरा डाले बैठी है।

पेड़ों का वन विभागों की संख्या लगातार घट रही है जिधर देखो पेड़ों को कटकर घर, उद्योग,मॉल ,पार्क बनाए जा रहे हैं। पर्यावरण की दशा ठीक उसी कैंसर से पीड़ित व्यक्ति के समान है जिसकी मदद तो संभव है परंतु संरक्षण की निश्चिता नहीं।

नॉन बायोडिग्रेडेबल सब्सटेंसस जैसे कि प्लास्टिक और अन्य ऑक्सीडेंट केवल गंदगी को बढ़ावा देते हैं और इनका निस्तारण भी पूर्णता संभव नहीं होता जोकि केवल पर्यावरण पर मौजूद होकर उसका हनन करते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव:-

पर्यावरण प्रदूषण आज हर मायने में मनुष्य के जीवन को प्रभावित करता है मनुष्य का जीवन पूरी तरीके से प्रदूषण से प्रभावित है सुबह से घर से निकलते ही मनुष्य और दूषित हवा को ग्रहण करता है जो कि पहले सोच शुद्ध व ताजी हुआ करती थी।

यह  जहरीली वायु मनुष्य में विभिन्न तरह के रोगों को उत्पन्न करती है। इन रोगों में दृष्टि रोग, चर्म रोग, सांस लेने में समस्या, सर दर्द होना, उल्टी, चक्कर शामिल है। इस पर्यावरण प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या भी उत्पन्न हो जाती है जो कि अपने आप में समस्याओं का समुंदर है।

बढ़ते जल प्रदूषण के कारण मनुष्य को वाज शुद्ध पेयजल प्राप्त नहीं होता दूषित जल ग्रहण करने के कारण विभिन्न तरह की शारीरिक व मानसिक बीमारियों का वह शिकार हो जाता है इसके चलते कई मनुष्य, पशु, पक्षी अपनी जान गवां बैठते हैं।

बढ़ते प्रदूषण के कारण आज मनुष्य बिना मास्क पहने घर के बाहर नहीं निकल सकता। वातावरण की शुद्ध हवा आज पूरी तरीके से दूषित हो चुकी है और इसके पीछे मानव के प्रकृति के प्रति दूर व्यवहार ही कारण है।

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का समाधान:-

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का समाधान निम्नलिखित है-

1) जल का संरक्षण करें:-

जल ही जीवन है इसलिए जल को नष्ट बिल्कुल भी ना करें जितना हो सके चल को बचा कर रखें। याद रखिए ऐसे बहुत से लोग हैं जो जल के बिना कई कई दिनों बिता देते हैं जहां पर सूखा पड़ जाता है वहां तो लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ता है तो इसलिए पानी को बचाकर इस्तेमाल करें।

धरती माता पर निबंध हिंदी में

2) कचरे का सही निस्तारण करें- 

उद्योगों से निकलता कचरा आज प्रदूषण को बढ़ाने में मुख्य कारण है इसलिए हमारी भारत सरकार और भारत के वैज्ञानिकों को औद्योगिक कचरे के निस्तारण के लिए आधुनिक तरीके निकालने चाहिए। जिससे कि इन सब पशुओं का सही निस्तारण हो सके और औद्योगिकरण प्रदूषण पर रोक लगे।

3) वन संपदा को बचाने का संकल्प ले:- 

पेड़ हमारी प्रकृति और वातावरण को शुद्ध हवा वह हमें जीवन प्रदान करने में महत्वपूर्ण रोल निभाते हैं इसलिए प्रतिदिन एक पेड़ लगाने का संकल्प लें।

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और उसके समाधान पर निबंध
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और उसके समाधान पर निबंध

वन महोत्सव जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दें। इन कार्यक्रमों में भाग ले और और लोगों तक भी जागरूकता फैलाए।

4) खूब विद्या ग्रहण करें:- 

ज्ञान ही हमारे विवेक को बढ़ाता और निकालता है इसलिए शिक्षा अवश्य ग्रहण करें। यदि हम शिक्षित होंगे तभी हम अपने अच्छे और बुरे को समझ पाएंगे और प्रदूषण जैसी समस्याओं को अपने देश व विश्व से दूर भगा पाएंगे।

क्या आपने इसे पढ़ा:- 

मै पृथ्वी बोल रही हूं निबंध 

5- प्लास्टिक को ना करें:- 

प्लास्टिक एक नॉन बायोडिग्रेडेबल सब्सटेंसस है और यह निस्तारित नहीं हो पाती है। इसलिए प्लास्टिक को ना करें बायोडिग्रेडेबल वस्तुओं का इस्तेमाल करें जिससे कि प्रदूषण ना फैले।

उपसंहार:- 

प्रदूषण आज हमारी प्रकृति पर हर तरह से हावी हो चुका है। हमारी प्रकृति को प्रदूषण से बचाना बहुत जरूरी हो गया है। अन्यथा कोई भी जीवित नहीं रहेगा।

तो दोस्तों आज हमने पर्यावरण प्रदूषण और उसके प्रभाव पर निबंध को पढ़ा। हम आशा करते हैं कि आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी ।

पृथ्वी बचाओ पर निबंध इन हिंदी

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धन्यवाद।

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