कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन में क्या अंतर हैं? | Covaxin Vs Covishield in hindi 2021

कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन में क्या अन्तर हैं?

हेलो दोस्तों, आज का विषय हैं कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन में क्या अंतर है? तो दोस्तो, जिस तरह से अब हम सभी को कोरोना वायरस के मामले में कमी देखने को मिल रही है, उसके पीछे हमारी-आपकी सतर्कता और सरकार द्वारा चलाया जा रहा वैक्सीन अभियान ही है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत देश में 16 जनवरी से वैक्सीनेशन शुरू किया गया और इसके अंतर्गत मुख्यतः कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन का उपयोग लगातार किया जा रहा है।तो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में मुख्य रूप से कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन में क्या अंतर है? पर विस्तार से चर्चा करेंगे। तो, अंत तक जरूर पढ़ें और अपने विचार भी जरूर बताएं। तो चलिए शुरू करते हैं-

कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन में क्या अंतर हैं? (Difference)

भारत में वैक्सीनेशन के लिए बहुत ही तेजी से कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है। जैसा कि हम पिछले आर्टिकल में कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन के फायदे पर बात कर चुके हैं तो आज हम इस पर बात करेंगे की कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन में क्या अंतर है?

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1- उत्पादन के आधार पर (On the Basis of Production)

कोवैक्सीन को प्रसिद्ध भारत बायोटेक ने पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च जो कि ICMR नाम से प्रसिद्ध है के साथ मिलकर बनाया है।

वही दूसरी ओर कोविशील्ड का उत्पादन सिरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (SII) ने Astrazeneca के साथ मिलकर बनाया है। दोनों वैक्सीन अपने आप में ही बेहतरीन और अलग हैं।

2- तत्वों के आधार पर (Components)

कोवैक्सीन एक तरह की इनएक्टिवेटेड (inactivated) वैक्सीन है, जोकि खुद बीमारी पैदा करने वाले खतरनाक वायरस को पूरी तरीके से निष्क्रिय (inaffective) करके बनाई जाती है।

वहीं दूसरी ओर कोविशील्ड चिम्पैंज़ी एडिनोवायरस वेक्टर के तहत बनी एक प्रभावशाली वैक्सीन है। कोविशील्ड को बनाने के लिए चिम्पैंज़ी को संक्रमित करने वाले वायरस पहले संशोधित किया जाता हैं जिससे की यह इंसानो मे ना फैले। इसके बाद इस संशोधित वायरस मे एक स्पाइक प्रोटीन मिलता है। यह वैक्सीन शरीर में लगने के बाद एक इम्यून रिस्पांस create करती है जोकि इन्हीं स्पाइक प्रोटीन पर काम करता है।

कोविशील्ड वैक्सीन शरीर में एंटीबॉडीज और मेमोरी सेल्स को बनाता है जोकि कोरोना वायरस को पहचान कर उनसे लड़ने में कारगर साबित होते हैं।

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3- फायदे के आधार पर (Benefits)

जब शुरुआत में कोवैक्सीन का इस्तेमाल हुआ था तब लोगों ने इस पर बहुत चिंता जताई थी परंतु धीमे-धीमे इस वैक्सीन के फायदे ने लोगों के होश उड़ा दिये।अमेरिका में स्थित व्हाइट हाउस में एक पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया गया कि कोवैक्सीन भारत में मौजूद डबल म्युटेंट वैरीअंट B.1617 को काफी हद तक मात देने में सफल है।

वहीं दूसरी ओर ऑक्सफोर्ड एस्ट्रेजनेका के द्वारा डिवेलप की गई कोविशील्ड वैक्सीन के फायदे भी कुछ कम नहीं है। इस वैक्सीन में मिलने वाले एंटीबॉडीज कोरोना वायरस को पूरी तरीके से खत्म करने की ताकत रखते हैं। यह दोनों वैक्सीन अपने आप में ही अनोखी व काफी हद तक प्रभावशील हैं।

4- प्रभाव के आधार पर (Effects)

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों ही वैक्सीन बहुत ही जबरजस्त और प्रभावी है। दोनों ही पूरी तरीके से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के standards को संतुष्ट करती हैं। दोनों ही वैक्सीन ने बीते फरवरी में अपने सबसे बड़े क्लीनिकल ट्रायल को सफलतापूर्वक पार किया है।

कोवैक्सीन का प्रभाव दर (efficacy rate) 78% है। वहीं दूसरी ओर कोविशील्ड का प्रभाव  दर 70% है जोकि दूसरे डोज के लगने के बाद 90% में बदला जा सकता है। यह दोनों वैक्सीन कोरोनावायरस के प्रभाव को कम करने में सहायक है।

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5- साइड इफेक्ट के आधार पर (Side-Effects)

प्रयोग में लाई गई सभी वैक्सीन रिएक्टोजैनिक साइड इफेक्ट के साथ ही आती हैं।
इसमें मुख्य रूप से इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द ,बुखार, सर्दी-जुकाम, उल्टी, बदन-दर्द जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। हालांकि कोवैक्सीन में शुरुआत से लेकर अभी तक कोई भी चिंताजनक साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिले हैं जो कि एक सकारात्मकता को दर्शाता है।

वहीं दूसरी ओर कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर कई विकसित देशों से चिंताजनक बातें सामने आई है। ऐसा माना गया है कि कोविशील्ड वैक्सीन के कारण शरीर में ब्लड क्लॉटिंग और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं उत्पन्न हुआ है , हालांकि इसकी संभावना बहुत ही ज्यादा कम है जिसके चलते इस वैक्सीन को सुरक्षित माना जा रहा है।

6- कीमत के आधार पर (Price)

यह दोनों वैक्सीन ज्यादातर जगह पर उपलब्ध है। कोवैक्सीन की कीमत कोविशील्ड से अधिक है। यह राज्य सरकारों के लिए रुपये 400 एवं प्राइवेट अस्पतालों के लिए 1200 तय किया गया है।

वहीं दूसरी ओर सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाई गई कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत राज्य सरकारों के लिए ₹300 एवं प्राइवेट अस्पतालों के लिए ₹600 तय किया गया है।

हालांकि कई राज्य सरकारों ने इसे मुफ्त में उपलब्ध कराने का निश्चय किया है और यह लगातार आगे भी बढ़ रहा है।

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7- दोनो डोज के बीच में समय के अंतर के आधारपर (Duration Between Doses)

कोरोना वायरस नाम की महामारी से बचने के लिए प्रयोग की जा रही दोनों वैक्सीन के 2-2 डोज निर्धारित किए गए हैं। इन दोनों डोज के बीच में कुछ अंतर निश्चित किया गया है। यह दोनों वैक्सीनो के लिए अलग-अलग है।

कोवैक्सीन में दूसरे डोज की जरूरत जहां चार से छह हफ्तों के बाद होती है वही कोविशील्ड मे अंतर 6 से 8 हफ्तों का रखा गया है हालाकी वैक्सीन की कमी होने के कारण अभी हाल ही में सरकार ने कोविशील्ड के लिए अंतर को 6 से 8 हफ्तों से बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया है।

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तो दोस्तों, आज हमने कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन में क्या अंतर है? पर विस्तार में चर्चा की। हम आशा करते हैं कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी। यदि आपको इसके बारे में और जानकारी हो तो हमें कमेंट सेक्शन में अवश्य बताएं। इस जानकारी को अपने दोस्तों रिश्तेदारों में सगे संबंधियों में भी अवश्य शेयर करें ताकि उन्हें भी इस जानकारी का लाभ मिले तो मिलते हैं हमारे दूसरे आर्टिकल में तब तक के लिए स्वस्थ रहें मस्त रहे।

FAQ

1- पहले कोवैक्सीन लगती है या कोविशील्ड?

आपको दोनों में से कोई एक ही वैक्सीन लगेगी और यह उसकी उपलब्धि पर निर्भर करता है। यदि आपके वैक्सीनेशन सेंटर पर कोवैक्सीन उपलब्ध है तो आपको कोवैक्सीन लगवाई जाएगी। यदि कोविशील्ड उपलब्ध है तो यह लगवाई जाएगी। हालांकि 45+ के सभी व्यक्तियों को कोविशील्ड ही लगवाई जा रही है।

2- कोवाक्सिन लगने पर फीवर नहीं आता है तो मान ले की वैक्सीन काम नहीं कर रही है?

नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। दोनों वैक्सीन के प्रभाव आपस में भिन्न हो सकते हैं और किसी भी लक्षण के ना दिखने का मतलब है कि शरीर ने वैक्सीन की प्रकृति को समझ लिया है और धीरे-धीरे यह वैक्सीन कार्य करने लगेगी।

3- अपने पास के वक्सीनशन सेंटर और अवेलेबिलिटी का पता कैसे लगाये?

नीचे दी हुई लिंक पर क्लिक करके आप अपने पास की वैक्सीनेशन सेंटर को आसानी से खोज सकते हैं वह उसकी अवेलेबिलिटी का भी पता लगा सकते हैं।
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