ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी- Dhwani pradushan essay in hindi

आज हम बात करेंगे ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी के बारे में अगर आप ध्वनि प्रदूषण पर निबंध dhwani pradushan par nibandh लिखना चाहते हैं तो आप एकदम सही पोस्ट को पढ़ रहे हैं ध्वनि प्रदूषण के बारे में आपको पूरी knowledge शेयर की जाएगी। ये निबंध सभी क्लास के स्टूडेंट्स के लिए लाभदायक होगा।

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दोस्तो Dhwani pradushan essay in hindi हमारे ही देश के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए समस्या है। हमारे देश में ध्वनि प्रदूषण दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है रुकने का तो नाम ही नहीं ले रहा है। ध्वनि प्रदूषण के बढ़ने के पीछे बहुत से कारण है आगे हम उन सभी कारणों पर बात करेंगे।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध कॉलेज या स्कूल दोनों में पढ़ने वाले स्टूडेंट के लिए है। जोकि 100 शब्दों में, 200 शब्दो में, 400 शब्दो में , 700 शब्दो में।

1- ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी (100- शब्दो में) – Dhwani pradushan par nibandh in hindi :-

हमारे देश में ध्वनि प्रदूषण कि समस्या बड़ी ही तेजी से महामारी की तरह फ़ैल रही है। अगर सरकार ने इससे संबंधित कोइट ठोस कदम नहीं उठाए तो हमारी आने वाली पीढ़ी को बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा। यह एक धीमे जहर की तरह है जो मानव जीवन को बेकार कर रहा है।

यह ज्यादातर बड़े शहरों में होता है, क्यूकि हमारे देश में बड़ी बड़ी industries, और कंपनी और सारे कारोबार बड़े शहरों में ही होता है। जिसके कारण बहुत जड़ा शोर होता है।

ध्वनि प्रदूषण सिर्फ मानव जाती के लिए ही नहीं अपितु सभी जीव जंतु के लिए भी हानिकारक है।
इसकी वजह से हमारे सभी पशु जो जंगल में रहते हैं उनकी भी दिनचर्या प्रभावित होती है।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी
ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी

2- ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी (200 शब्दो में) – Sound Pollution essay in hindi

ध्वनि प्रदूषण पूरे विश्व की समस्या बन चुकी है और आप सब का सवाल होता है कि ध्वनि प्रदूषण कितने डेसीबेल ध्वनि से होता है? तो मै बता दूं कि 40 डेसीबेल से ऊपर की तेज़ और ना झेल पाने वाली आवाज को ध्वनि प्रदूषण कि श्रेणी में रखा गया है।

और अगर इससे ज्यादा ही कुछ और होता है तो वह मानव जीवन और हमारे पशु पक्षी दोनों के लिए हानिकारक होगा।

अगर कोई व्यक्ति अपना अधिकतर समय भीड़ भाड़ जैसी जगह पर बिताता है या फिर ज्यादा शोर-शराबे वाली जगह पर बिताता है तो धीमे धीमे उसकी सूनने की क्षमता क्षीण होने लगती है।

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ध्वनि प्रदूषण के क्या प्रभाव है:-

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव से ही व्यक्ति, या मनुष्य को को मानसिक बीमारी जैसे चिड़चिड़ापन, सर दर्द करना, और सर भारी होना, आदि हो सकता है, और साथ ही साथ शारीरिक बीमारी जैसे हाई ब्लड प्रेशर, रक्त प्रवाह की गति धीमी होना, जिससे हार्ट अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है। ध्वनि प्रदूषण से होने वाली ये बीमारियां है

इसी कारण वस ये ध्वनि प्रदूषण इतना खतरनाक है हमारे लिए और साथ साथ शोर वन्य जीव जंतु की दिनचर्या पर भी प्रभाव डालता है।

ध्वनि प्रदूषण के क्या कारण है– Dhwani pradushan ke kaaran:

ध्वनि प्रदूषण का अगर जल्दी ही कोई समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।

वायु प्रदूषण पर निबंध 

बड़े बड़े उद्योग, बड़े बड़े कारखाने, हवाई जहाज,  बड़ी बड़ी मशीनें, निर्माण कार्य, तेज़ तेज़ हॉर्न बजाना, ओर मल्टीपल लाउडस्पीकर जो पार्टी और शादी वगैरा में लगता है, ये सभी ध्वनि प्रदूषण के कारण है।

ध्वनि प्रदूषण को रोकने का उपाय क्या है:-

ध्वनि प्रदूषण को रोकने के कई उपाय है:-

1- शोर शराबे वाली जगह से दूर रहे।

2- उद्योगों को शोर शराबे वाली जगह से दूर रखना होगा।

3- हॉर्न और लाउडस्पीकर को कम से कम इस्तेमाल करना होगा।

4- समय समय पर बड़ी बड़ी मशीनों की मरम्मत करवानी होगी। ताकि वो ज्यादा तेज़ आवाज़ ना करे। तभी ध्वनि प्रदूषण का हानिकारक प्रभाव कम किया जा सकता है।

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3- ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी (400 शब्दो में) – dhwani pradushan par nibandh:-

ध्वनि प्रदूषण क्या है- Dhwani Pradushan प्रस्तावना:-

ध्वनि प्रदूषण, प्रदूषण का ही एक रूप है, जिसको आसान शब्दों के समझे तो हमारे वातावरण में जो तेज़ और असहनीय आवाज़ उत्पन्न होती है, वहीं ध्वनि प्रदूषण कहलाती है। अत्यधिक तेज़ आवाज़ ज्यादातर छोटे बच्चे और बड़े बुजुर्गो पर प्रभाव डालती है।

ध्वनि प्रदूषण बहरापन का भी एक कारण है, ये धीरे धीरे हमारे शरीर को बिगड़ता है और ये हमें पता भी नहीं चलता है इतना धीमे धीमे हमारे शरीर पर प्रभाव डालता जाता है।

जहां science ने इतनी तरक्की की है, वहीं धीमे धीमे ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ा है, और अब हमारे समाज में पूरी तरह से अपने पैर पसार लिया है। जोकि बड़े बड़े उद्योग, और लाउडस्पीकर की ही देन है।

आजकल घर में टीवी, रेडियो, और लाउडस्पीकर  आ गए हैं जोकि सारा दिन बजते रहते हैं और चलते रहते हैं। और अजीब ही तेज़ ध्वनि फैलाते रहते हैं। जिससे वातावरण में ध्वनि प्रदूषण फैलता है रहता है।

ध्वनि प्रदूषण कैसे होता है:-

मानव अपने जीवन में अपनी कंफर्ट जोन की चीजें इस्तेमाल करने में लगा हुआ है। जैसे टीवी लाउडस्पीकर, बुफर और अन्य उपकरण जिस काफी तेज आवाज होती है।

इन सभी चीजों से हमारे पर्यावरण में अधिक मात्रा में प्रदूषण उत्पन्न होता है, जिसपर हम मानव ध्यान नहीं देते हैं। और भविष्य में यह सभी चीजो से उत्पन्न हुई बीमारियों के हम ही शिकार हो जाते हैं। और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे जीव जंतु और पशु पक्षियों पर पड़ता है। उनकी स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। ये हमारे लिए चिंताजनक विषय है।

ध्वनि प्रदूषण के कारण और प्रभाव क्या क्या है:-

1- प्रेशर हॉर्न का प्रयोग करना।

2- मानव द्वारा लाउडस्पीकर, और बुफर जैसी
चीज का अत्यधिक उपयोग करना ।

3- शहरों में बढ़ते निर्माण कार्य भी कहीं ना कहीं ध्वनि प्रदूषण के कारण है।

4- जनसंख्या वृद्धि भी ध्वनि प्रदूषण का कारण है क्युकी जितनी जनसंख्या बढ़ेगी उतने उपकरणों का प्रयोग भी बढ़ेगा जिसकी वजह से ध्वनि प्रदूषण होगा।

5- शहरों में बढ़ता ट्रैफिक जिसकी वजह से किसी चौराहे पर या मेन रोड पर अत्यधिक गाड़ियां रूकती है और उसकी आवाज से भी ध्वनि प्रदूषण की स्थिति उत्पन्न होती है।

ध्वनि प्रदूषण के कारण और प्रभाव क्या क्या है।
ध्वनि प्रदूषण के कारण और प्रभाव क्या क्या है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव:-

1- ध्वनि प्रदूषण के कारण ही मनुष्य के मन में चिड़चिड़ापन रहता है, साथ ही साथ उसे सर दर्द जैसी बीमारियां भी रहती है।

2- अगर कोई व्यक्ति हर वक्त तेज आवाज के संपर्क में रहता है तो उसके सुनने की क्षमता दिन प्रतिदिन कम होती जाती है, और कई लोग तो बेहरेपन का भी शिकार हो जाते हैं।

3- तेज़ आवाज़ से हमारे जीव जंतुओं को भी काफी हद नुकसान होता है। उनपर भी खतरा है।

ध्वनि प्रदूषण को रोकने का उपाय:-

क्योंकि ज्यादातर ध्वनि प्रदूषण मानव द्वारा ही फैलाया गया है इसलिए जब तक मानव और हमारी सरकार इस पर ठोस कदम नहीं उठाएगी तब तक यह कम होने वाला नहीं है।

लेकिन कुछ ऐसी बातें हैं और उपाय हैं जिसको अगर हम सच्ची लगन के साथ करेंगे तो अवश्य परिणाम सार्थक आएंगे ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपाय कुछ इस प्रकार है-

1- ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए लोगों को लाउडस्पीकर और बूफर जैसी चीजों का प्रयोग कम करना होगा

2- बेवजह और फालतू में हॉर्न बजाना कम करना होगा।

3- औद्योगिक धंधों को आबादी वाले क्षेत्र से दूर स्थापित करना होगा।

4- बड़ी-बड़ी कंपनियों में और इंडस्ट्री में मशीनों को समय-समय पर मरम्मत करवाना होगा।

5- ट्रैफिक पुलिस की बात माननी होगी जिसके फल स्वरूप कहीं भी जाम नहीं लगेगा। और ध्वनि प्रदूषण भी नहीं होगा।

4- ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी (700 शब्दो में)

ध्वनि प्रदूषण हर जगह बड़ी तेजी से फैल चुका है। और इसको खत्म करने लगभग असंभव है। क्योंकि मानव इसी के ही द्वारा बातचीत कर पाते हैं और जीव जंतु भी इसी माध्यम से ही बात करते हैं।

भारत के बढ़ते शहरों की वजह से जनसंख्या का एक भाग शहरों में रहता है। और वह पर भीड भी जाड़ा होती है अब ये स्वाभाविक सी बात है जहां लोग ज्यादा होंगे वह शोर भी ज्यादा होगा। और यही ध्वनि प्रदूषण को जन्म देता है।

हालांकि ध्वनि प्रदूषण को खत्म तो नहीं किया जा सकता पर हां कम जरूर किया जा सकता है और कम करने के लिए सरकार उचित प्रयास भी कर रही है। लेकिन जब तक लोग स्वयं नहीं सोचेंगे कि हमें इस प्रदूषण को कम करना है तब तक यह प्रदूषण कब होने वाला नहीं है सभी को ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए जिम्मेदारी निभानी होगी।

ध्वनि प्रदूषण को एक तरह से दो भागों में बांटा गया है।

1- प्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण
2- अप्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण

1- प्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण :-

प्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण को हम इस तरह से समझते हैं जोकि पृथ्वी पर कोई आपदा आने से जो भयंकर आवाजें होती है, और विभिन्न प्रकार की घटनाओं से जो आवाज़ उठती है उसे प्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण कहते है।

प्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण के कारण:-

प्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण के कारण कुछ इस प्रकार है जैसे-

1- बादलों का गर्जना जोकि प्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण है। ऐसा प्रदूषण जो हम इंसान नहीं बल्कि प्रकृति के कारण हो उसे प्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण कहेंगे।

2- ज्वालामुखी का फटना :- यह भी एक ऐसा प्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण है, जिससे बहुत ही भारी मात्रा में शोर उत्पन्न होता है। और साथ ही साथ इससे वायु और जल प्रदूषण भी होता है।

3- Earthquake का आना :- यह भी एक तरीके का प्राकृतिक भरी प्रदूषण है इसके आने से भी बहुत ही भारी मात्रा में ध्वनि उत्पन्न होती है जो कि मनुष्य के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है।

हालांकि अर्थक्वेक का आना ही एक प्राकृतिक आपदा है मगर इसका ध्वनि प्रदूषण से भी संपर्क है।

अप्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण:-

अप्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण वही प्रदूषण है जिसके बारे में हमने अभी तक बात की जो हम मनुष्य द्वारा होता है जिस प्रदूषण को हम मनुष्य मिलकर जन्म देते हैं वह अप्राकृतिक प्रदूषण ही कहलाता है।

अप्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण के मुख्य कारण:-

1- जनसंख्या के कारण शोर उत्पन्न होता है।

2- सुपर सनिक रफ्तार से चलने वाले वायुमान  अधिक मात्रा में शोर उतन्न करते हैं। ये सभी अप्राकृतिक ध्वनि प्रदूषण के कारण है।

3- Daily सड़क पर दौड़ने वाले यातायात के वाहन जैसे- गाड़ी मोटर, कार, बस, ट्रक, ट्रेक्टर, बड़ी बड़ी ट्रेन जिससे भारी मात्रा में शोर उत्पन्न होता है।

4- रोड के निर्माण कार्य जैसे – बुलडोजर, क्रेन, और अन्य मशीनें औजार जो भारी मात्रा में शोर उत्पन्न होता है।

5- त्योहारों पर की जाने वाली आतिशबाजी ओ को भुलाया नहीं जा सकता वह भी बहुत बड़ी मात्रा में ध्वनि प्रदूषण फैलाती है। दिवाली जैसे बड़े पर्व पर ध्वनि प्रदूषण अथवा वायु प्रदूषण दोनों बड़ी तेजी से बढ़ते हैं।

6- देश विदेश में चिते और शेरो कि दहाड़, शेरनियों कि दहाड़ से भी कम ध्वनि प्रदूषित नहीं होती है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव क्या क्या हैं:-

1- मनुष्य बहरे पन का शिकार हो जाता है।

2- अत्यधिक ध्वनि के कारण चिड़चिड़ाहट, और सर दर्द जैसी बीमारियां भी पकड़ लेती है।

3- रक्त का प्रवाह कम हो जाता है, high blool pressure, और हार्ट अटैक की भी संभावना बढ़ जाती है।

4- पशु पक्षियों पर भी प्रभाव पड़ता है, उनके लिए भी ये अभिशाप के समान ही है।

5- इसकी चपेट पर बुजुर्ग और छोटे बच्चे बहुत जल्दी आते हैं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए यह आवाजे और शोर-शराबा बहुत कष्टकारी है।

6- ध्वनि प्रदूषण से मानव का पंच तंत्र भी प्रभावित होता है।

ध्वनि प्रदूषण के रोकथाम और निवारण के उपाय:-

ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए हमें सबसे पहला काम यह करना है कि हम ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाएं। क्योंकि पेड़ 10 से 15 डेसीबल तक की ध्वनि को रोक सकते हैं, और यह हमारे लिए सबसे जरूरी है की हम ज्यादा से ज्यादा शोर-शराबे वाली जगहों से दूर रहे।

और हमें कम आवाज़ करने वाली मशीनों का उपयोग करना होगा। प्राचीन और पुरानी कार मोटरों का इस्तेमाल बहुत कम करना होगा। लाउडस्पीकर का भी प्रयोग कम से कम करना होगा।

आइए पॉइंट पर जानते हैं कि हम किस किस प्रकार से भरे प्रदूषण को रोक सकते हैं-

1- सबसे पहले हमें लोगों को अपने समाज में सभी को इस ध्वनि प्रदूषण के लिए जागरूक करना होगा। और उन्हें यह भी बताना होगा कि सिर्फ मनुष्य और व्यक्ति ही नहीं बल्कि पशु पक्षी भी काफी प्रभावित होते हैं।

2- ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से जगह-जगह जाकर लोगों को जागरूक करना चाहिए जिससे कि लोग श्लोक इस को शांतिपूर्ण तरीके से समझे और इस पर अमल भी कर पाए।

3- सड़कों की जो चौड़ाई होती है उसे भी बढ़ा देनी चाहिए जिसमें कि जाम ना लगे और शोर-शराबा भी कम हो।

3- औद्योगिक क्षेत्रों को ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखना।

4- हरियाली को पेड़ पौधों को जगह जगह लगाना चाहिए क्योंकि एक सर्वे में ऐसा साबित हुआ है कि पेड़ पौधे 10 से 15 डेसीबल ध्वनि को रोक लेते हैं और ध्वनि प्रदूषण होने से रोकते हैं।

5- बड़े बड़े वाहनों का भीड़ भाद वाली जगह में प्रवेश निषेध हो जाना चाहिए।

6- शादी, त्यौहार, मेला, अथवा पार्टियों में लाउडस्पीकर को काम मैं नहीं लाना चाहिए।

7- रेलगाडियों कि और पटरियों कि समय-समय पर मरम्मत हो ताकि ध्वनि प्रदूषण थम सके।

8- रात के समय तो लाउडस्पीकर को बजाने पर रोक लगानी चाहिए।

9- ध्वनि प्रदूषण पर कानून को नए कानून बना कर रोक लगानी चाहिए।

10- दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर पटाखे और अन्य प्रकार के बॉम्ब और तरह तरह की आतिशबाजियों पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण के रोकथाम और निवारण के उपाय
ध्वनि प्रदूषण के रोकथाम और निवारण के उपाय

उपसंहार:-

अगर ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के उपाय जल्द से जल्द लागू नहीं किए गए तो भविष्य में हम सभी को बहुत बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। और यह हम सबके लिए बहुत खतरनाक साबित होगा।

हालांकि हमारी सरकार के द्वारा सारे प्रयास जारी है परंतु हम जब तक स्वयं कुछ नहीं करेंगे तब तक यह प्रदूषण रोकने वाला नहीं है। इसलिए सबसे पहले हमें ही इसके प्रति जागरूक होना होगा।

ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने कई सारे नियम बनाए हुए हैं लेकिन हम मनुष्य के द्वारा और नियम का पालन बड़ी मुश्किल से हो पा रहा है हमें सख्त हो करके इन सभी नियमों का पालन करना होगा जिसमें कि हम सोनी प्रदूषण को रोक सके और इससे छुटकारा भी पा सके।

जगह-जगह पेड़ लगाएं, लाउडस्पीकर का कम प्रयोग करें, शोर-शराबे वाली जगहों से दूर रहें, बड़ी पुरानी मशीनों का प्रयोग कम करें, शादी विवाह पार्टी अन्य जगहों पर बड़े-बड़े बूफर डीजे और लाउडस्पीकर जैसी चीजों का प्रयोग कम से कम करें। तो हम ध्वनि प्रदूषण होने से रोक सकते हैं।

तो आज हमने ध्वनि प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी आर्टिकल में ध्वनि प्रदूषण पर पूरी जानकारी प्राप्त करी है आशा करता हूं कि आप बताई हुई सारी चिजॊ पर अमल करेंगे। और हम सब मिलकर ध्वनि प्रदूषण को बढ़ने से रोकेंगे।

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