शिक्षा के निजीकरण पर निबंध essay on Privatization of education in hindi

शिक्षा के निजीकरण पर निबंध या essay on privatization of education in hindi आपसे पूछा जाता है तो आप इस निबंध को आसानी से देख कर समझ कर अपने स्कूल या कॉलेज में बड़ी ही आसानी से लिख सकते हैं। आज के इस निबंध में आपको शिक्षा के निजीकरण से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कराई जाएगी।

शिक्षा के निजीकरण पर निबंध के शीर्षक कुछ इस प्रकार है:-

1- प्रस्तावना / भूमिका
2- शिक्षा के निजीकरण के कारण
3- सरकारी स्कूलों में बिगड़ती हालत
4- निजी क्षेत्र में शिक्षकों का शोषण
5- निजी क्षेत्र के स्कूल और कालेजों के बढ़ते भाव
6- उच्च शिक्षा और निजीकरण
7- उच्च शिक्षा के निजीकरण का उद्देश्य
8- उच्च शिक्षा में निजीकरण का लाभ
9- उपसंहार / निष्कर्ष

1- प्रस्तावना / भूमिका:-

किसी भी बच्चे, या व्यक्ति, या औरत उसके विकास का एकमात्र कारण शिक्षा ही होता है। अतः शिक्षा के कल्याण के लिए सभी को अपना प्रयास निरंतर रखना चाहिए। कोई भी राष्ट्र या देश अपने नागरिकों को शिक्षा के अधिकार से दूर रखता है तो वो कल्याणकारी राज्य या देश की सूची में कदा भी नहीं आ सकता है। आज हम शिक्षा के निजीकरण से जुड़ी हर पहलुओं पर बात करेंगे। हर किसी को शिक्षा में प्रगति पाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए और हमारी सरकार को इस पर हर संभव प्रयास करना चाहिए।

शिक्षा के निजीकरण पर निबंध इन हिंदी
शिक्षा के निजीकरण पर निबंध इन हिंदी

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2- शिक्षा के निजीकरण के कारण:-

भारत जैसे बड़े और अखंड देश में शिक्षा की व्यवस्था सही तरीके से कर पाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती रही है और भारत की 1 अरब की जनसंख्या को पूर्णतः शिक्षित करना लगभग असंभव सा है।

इतने ज्यादा लोगो को शिक्षित करने के लिए सरकार के पास ना तो इतना आर्थिक साधन है और ना ही पर्याप्त प्रबंधकीय सुविधाएं उपलब्ध है।

भारत जैसे बड़े देश में शिक्षा का स्वामित्व और उत्तरदायित्व केंद्र सरकार के पास ना होकर राज्य सरकार के पास है। और राज्य सरकारों की आर्थिक स्थिति पहले से ही ठीक ना है। अतः जनसंख्या वृद्धि के इस बढ़ते अनुपात में राज्य सरकार के पास नए स्कूल व कॉलेज खोलने के लिए आर्थिक संसाधन भी उपलब्ध नहीं है।

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यही एकमात्र प्रमुख कारण है जिसकी वजह से शिक्षा का निजीकरण हो रहा है और दिन प्रतिदिन नए स्कूल खुल रहे हैं। और हमारी सरकार को भी इसमें आपत्ति नहीं है। काफी समय पहले से ही ये प्राइवेट स्कूल और कॉलेज बच्चो को और लोगो को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। भले ही इसके चलते अभिभावक से फीस के नाम पर ज्यादा पैसा ले रहे हों।

3- सरकारी स्कूलों की बिगड़ती हालत:-

सरकारी स्कूल की हालत इतनी ज्यादा बिगड़ गई है कि वहां पर पढ़ाई के नाम पर बस बच्चे स्कूल खाना खाने जाते हैं। और शिक्षा के तीन स्तर है प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा आज तीनों स्तर पर ही शिक्षा का निजीकरण हो रहा है। प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर जितने भी नए विद्यालय खोले जा रहे हैं वह 90% निजी मालिकों के द्वारा खोले जा रहे हैं।

सच तो यह है कि नगरों में गांव में सरकारी स्कूल के छात्र दिन प्रतिदिन घटते जा रहे हैं। और सभी छात्र निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहे हैं। वहां पर उन्हें अच्छी शिक्षा प्रदान कराई जा रही है। सरकारी स्कूल की दशा कुछ ऐसी है की स्कूल तो बने हुए परंतु बच्चों के ना होने के कारण स्कूल बंद पड़े हैं।

बच्चों के माता-पिता भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की बजाय प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं। क्युकी सरकारी स्कूल में पढ़ाई का स्तर इतना खराब है कि बच्चों को शिक्षा नहीं मिलती है।

4- निजी क्षेत्र में शिक्षकों का शोषण:-

आजकल गली मोहल्ले तक में प्राइवेट स्कूल खुल गए हैं। इन सभी स्कूलो में पढ़ाने वाले शिक्षकों को रोजगार तो मिल रहा है परंतु निजी क्षेत्र के प्रबंधकों द्वारा आर्थिक शोषण भी किया जा रहा है। M.a. पास और b.ed की उपाधि वाले अध्यापकों को 3 से 4 हज़ार रुपए में रख लिया जाता है और वो हसी खुशी काम करने के लिए तैयार भी हो जाते हैं।

इन स्कूल में सरकार द्वारा निर्धारित वेतन नहीं दिया जाता है। और बिना किसी सिक्योरिटी के अध्यापक बिना किसी शर्तों के काम करने के लिए हामी भर देते हैं तो उनसे अधिक से अधिक काम लिया जाता है। और हर स्तर पर उनका शोषण किया जाता है।

5- निजी क्षेत्र के स्कूलों और कालेजों के बढ़ते भाव:-

पब्लिक तथा कॉन्वेंट स्कूलों का धंधा बड़े जोरों शोरों से चल रहा है और बच्चो को लेके जाने के लिए बस सुविधा और पहुंचने की भी उचित सुविधा है। बच्चो की पढ़ाई से लेकर खेल कूद के लिए मैदान भी उपलब्ध है।

स्कूल की अपनी यूनिफॉर्म है। भारी भरकम पाठ्यक्रम भी मौजूद है। ऐसे में बच्चो के माता पिता को भी लग रहा है की बच्चे अच्छे से  पढ़ रहे हैं। और उन्हें उचित शिक्षा प्रदान की जा रही है।

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मगर दूसरी तरफ दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों में अपने बच्चो का स्कूल में एडमिशन कराना टेढ़ी खीर बन गया है। मंत्रियों तक की शिफारिश को नजरंदाज कर दिया जाता है।

माता पिता का शैक्षिक स्तर, समाजिक स्तर, और आर्थिक स्तर सब कुछ उच्च वर्ग का होना चाहिए तभी बच्चो का एडमिशन हो पाएगा। और एडमिशन के लिए डोनेशन के रूप में मोटी राशि चुकाने की क्षमता भी होनी चाहिए।

तभी ऐसे बड़े स्कूलों मै प्रवेश मिल सकता है। सच बात तो ये है की इन स्कूलों में एडमिशन दिला पाना बहुत ही कठिन हो गया है। और इधर अलग ही भ्रष्टाचार चल रहा है।

6- उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण:-

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी शिक्षा संस्थानों का बोलबाला दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है, खास कर के व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ सालों से एं संस्थाओं की बांढ सी आ गई है। चिकित्सा, इंजीनियरिंग, होटल मैनेजमेंट, टूरिज्म,  माइक्रोबायोलॉजी तथा अन्य क्षेत्रों के स्कूल खुल रहे हैं।

इन संस्थानों में फीस के नाम पर हजारों लाखों रुपए बच्चों के पेरेंट्स से लिया जा रहा है। ना तो इन्हे उच्च कोटि के प्रतिष्ठित शिक्षकों द्वारा शिक्षा मिल पा रही है और ना ही सरकार के द्वारा निर्धारित मानदंडों को ये संस्थाएं पूरा कर पा रही है।

उच्च स्तर पर इन्हे कॉलेज खोलने की मान्यता लेनी पड़ती है। और डिग्री के लिए किसी विश्वविद्यालयों से संबद्धता होनी आवश्यक हो। किन्तु इन संस्थानों के पास ऊंची पहुंच और जेब में मोटी रकम है जिसके  द्वारा ये बड़ी ही आसानी से व्यवस्था कर लेते हैं।

सच तो यह है कि शिक्षा के निजीकरण के बाद भारत में एक नया व्यवसाय उभर कर सामने आया है वह है शिक्षा का व्यवसाय।

7– उच्च शिक्षा में निजीकरण के उद्देश्य:-

  • बच्चों को उच्च स्तर पर शिक्षा प्रदान करवाना।
  • शिक्षा का मोल अपने भारत में ऊपर उठाना।
  • अध्यापकों को रोजगार प्रदान करवाना।
  • हर गली मोहॉले में स्कूल और कॉलेज का ओपन होना।
  • सरकार पर से इसका भार कम करवाना।

8- उच्च शिक्षा में निजीकरण का लाभ:-

1- शिक्षा में निजीकरण के बाद सबसे पहला लाभ यह हुआ है कि छात्रों में शिक्षा के प्रति लगन बढ़ गई है। जहां सरकारी स्कूल में बच्चो को अच्छी शिक्षा नहीं मिलती थी अब निजी स्कूलों में मिलने लगी है।

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2- एक अरब की आबादी हमारे भारत की होने के बावजूद शिक्षा का स्तर धीमे-धीमे ऊपर उठना है एजुकेशन सिस्टम में भी आगे चलकर सुधार किए जाएंगे।

3- एक लाभ ये भी है कि शिक्षकों को रोजगार दिया गया है।

9- निष्कर्ष / उपसंहार:-

आज के शिक्षा के निजीकरण पर निबंध के टॉपिक में हमने जाना कि किस प्रकार हमारे देश में शिक्षा का दर्पण धुंधला होता जा रहा है। और कैसे निजीकरण के बाद ये धीमे धीमे साफ हो रहा है। मगर ये पूरी तरह से उचित है ऐसा भी नहीं कहा जाएगा। क्युकी आपने देखा ही किस प्रकार बड़े बड़े निजी यूनिवर्सिटी में लाखों रुपए चूसे जा रहे हैं। और मोटी रकम देकर डोनेशन देकर एडमिशन हो रहा है।

Essay on privatization of education in hindi
Essay on privatization of education in hindi

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सधन्यवाद ।

2 thoughts on “शिक्षा के निजीकरण पर निबंध essay on Privatization of education in hindi”

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