बैंक निजीकरण पर निबंध हिंदी में | Bank Privatization Essay in hindi.

आज हम बात करेंगे निजीकरण यानी कि प्राइवेटाइजेशन। आज कल के बढ़ते दौर में काफी सेक्टर्स के निजीकरण हो रहे हैं। कुछ दशक पहले तक सब कुछ राजकीय था यानी कि  भारत सरकार के अन्तर्गत था। जब से हमारा देश आजाद हुआ 1947 तब से सब कुछ सरकार के अंतर्गत था।

परंतु सरकार को कई सारे क्षेत्रों में नुकसान होने लगा तब से निजीकरण के लिए कई सारे बदलाव किए गए। आज हम बात करेंगे बैंक निजीकरण पर निबंध हिंदी में Bank Privatization Essay in hindi. जिसमें आपको बैंको को किस प्रकार निजी करा गया गया है उसके बारे में डिटेल में पता चलेगा।

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बैंक प्राइवेटाइजेशन को जानने से पहले हमें यह समझना चाहिए कि निजीकरण क्या है?

निजीकरण का अर्थ:-

निजीकरण का आसान सा मतलब यह है कि किसी सार्वजनिक या सरकारी क्षेत्र की कमांन किसी निजी मालिकों के हाथ में देना और ये प्रक्रिया सरकारी की मर्ज़ी से हो तो वो प्रक्रिया निजीकरण कहलाती है।

भारत में निजीकरण मुख्य रूप से आजादी के बाद ही शुरू हो गया। लेकिन तब बहुत ही नॉर्मल सा ही निजीकरण हुआ था। लेकिन फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम जैसे विकसित इन सब देशों ने पहले ही इस में अपने हाथ जमा लिए थे और ये  सफल भी साबित हुआ था।

निजीकरण पर निबंध इन हिंदी

बैंक निजीकरण पर निबंध (प्रस्तावना)

आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया के चलते सरकार ने सन् 1992 में निजी बैंकिंग क्षेत्र को भारत में प्रवेश करने की अनुमति दे दी है। अब एक निश्चित प्रक्रिया का पालन करने के बाद निजी बैंक्स अपना कारोबार भारत में कर सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में निजी बैंक के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ी हैं। तथा ग्राहक को बेहतर सुविधाएं दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना यह भी है कि सरकार और बैंक को निजीकरण में तब्दील करने पर विचार कर रही है।

बैंक निजीकरण पर निबंध हिंदी में
बैंक निजीकरण पर निबंध हिंदी में

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में निजीकरण का प्रभाव:-

आइए एक नजर डालते हैं और जानते हैं कि हमारे बैंकिंग क्षेत्र में निजीकरण का क्या प्रभाव पड़ा है:-

1- क्षमता में वृद्धि:-

भारत में बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण के बाद अब स्थिति बदल गई है और अब इस क्षेत्र की शक्ति तुलनात्मक रूप से कुशल हाथो में चली गई हैं। और इस प्रकार अब बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति में काफी सुधार हुआ है।

2- सेवाओं का बेहतर होना:-

देश में कुछ ही प्राइवेट बैंक खुले हैं और इस क्षेत्र में प्रतियोगिता के चलते ग्राहकों को सेवाएं बड़ी ही बेहतर मिल रही है और सरकारी बैंक हो या प्राइवेट दोनों ही बैंक ज्यादा से ज्यादा ग्राहक को अपनी ओर लाने के लिए अच्छी सेवा प्रदान कर रहे है।

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3- योजना और ब्याज दरों में बढ़ोतरी:-

ग्राहकों को अपनी ओर खींचने और उनसे बेहतर लाभ कमाने के लिए निजी बैंक एक से बढ़कर एक स्कीम लाते ही रहते हैं और ग्राहकों को ज्यादा ब्याज और विभिन्न प्रकार के अन्य लाभ प्रदान करते रहते हैं। यह आम जनता के हित में ही काम करते हैं।

4- ग्राहकों को बेहतर सहायता मिलना:-

बैंकों के निजीकरण होने के बाद ग्राहकों को एम्पलॉइज से काफी सहायता मिली हैं और सेवाओं में भी काफी सुधार हुआ है। निजी बैंकों में कॉल सेंटर होते हैं। जो ग्राहकों की बात सुनते हैं उनकी शिकायत सुनते हैं और उसको जल्द से जल्द समाप्त करने का पूर्ण प्रयास करते हैं।

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5- लाभ कमाने के लिए गलतफहमी:-

चूंकि जितनी भी प्राइवेट कंपनी होती है वह अपने फायदे के लिए काम करती है। शुरुआत में जब आप खाता खुलवा ले जाते हो तो आपको बताते हैं कि यह इंटरेस्ट रेट मिलेगा और यह लाभ होगा यह चीजें मिलेगी और खाता खोलने के बाद वो सभी बातें निरर्थक हो जाती हैं।

बैंक निजीकरण के लाभ :-

बैंक निजीकरण के लाभ कुछ इस प्रकार है आइए एक नजर डालते हैं:-

  1. बैंक अपनी पूंजी स्वयं ही जुटा लेंगे और इससे सरकार पर भी ज्यादा प्रेशर नहीं होगा।
  2. ग्राहकों को बेहतर से बेहतर सेवाएं मिलेगी और अनुशासन में भी बढ़ोतरी होगी।
  3. बैंकों के बीच प्रतियोगिता बढ़ेगी और इससे ग्राहकों को समुचित लाभ होगा जिनके हम हकदार हैं।
  4. कर्मचारियों में भी ढेर सारी फाइल और ढेर सारे काम का बोझ भी कम होगा।
  5. बैंकों को हर स्तर पर लाभ होगा और सरकार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
  6. निजी करण का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि सरकार का ऋण कम हो गया है।

बैंक निजीकरण की हानि/दोष:-

बैंक निजीकरण की हानि भी अपने आप में सार रखती है चलिए जानते हैं कि बैंक निजीकरण की हानि क्या क्या है?

1- देश में उद्योगपतियों को बढ़ावा देना:-

बैंकिंग निजीकरण की सबसे बड़ी हानि यही है कि हमारी सरकारी संपत्ति पर उद्योगपतियों का शिकंजा कसेगा। जिस प्रकार हम जानते हैं कि उद्योगपति केवल अपने फायदे के लिए कार्य करते हैं तो ऐसे में बैंकिंग निजीकरण आम जनता के लिए एक कमजोर कड़ी के समान है।

2- विरोध का विस्तार:-

बैंकिंग निजीकरण का मुद्दा देश में विरोध का विस्तार करेगा लोगों में बढ़ते असंतोष के चलते बैंकिंग निजीकरण का जमकर विरोध होगा जिससे कि हमारे देश की आंतरिक शांति वह संपत्ति को भीषण हानि पहुंचेगी।

3- सरकारी संपत्तियों में कमी आएगी:-

बैंकों के निजीकरण होने से हमारे देश की सरकारी संपत्तियों में कमी आएगी क्योंकि निजी करण के पश्चात सभी बैंक प्राइवेट के अंतर्गत कहलाए जाएंगे अर्थात उन पर भारत सरकार का आधिपत्य समाप्त हो जाएगा।

4- आर्थिक अशांति बढ़ेगी:-

सरकार लोगों की भलाई के लिए कार्य करती है और इसके विपरीत उद्योगपति केवल अपने फायदे के लिए कार्य करते हैं तो ऐसे में बैंकिंग निजी करण देश में आर्थिक अशांति को जन्म देगा और समाजवाद को अंत की ओर ले कर जाएगा।

5- समाजवाद का खात्मा:-

बैंकिंग निजीकरण का मामला भारत देश में पूंजीवाद को बढ़ावा देगा और समाजवाद को बुरी तरीके से झकझोर कर रख देगा।

बैंक निजीकरण की हानि / दोष
बैंक निजीकरण की हानि / दोष

निष्कर्ष / उपसंहार:-

आज हमने बैंक निजीकरण पर निबंध हिंदी में  बैंक निजीकरण के बारे में विस्तार से जाना और सरकार को इसमें विभिन्न पहलुओं पर खासा ध्यान देना होगा। इसके अपने है फायदे और नुकसान दोनों ही हैं। हम इसे संपूर्ण स्थिति में फायदेमंद या नुकसान कारी नहीं बोल सकते हैं।

आपको हमारा बैंक निजीकरण पर निबंध हिंदी में Bank Privatization Essay in hindi. कैसा लगा नीचे कॉमेंट कर के अपनी राय अवश्य दें।

क्या आपने हमारी यह पोस्ट पढ़ी:-

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